पाठ का सारांश
इस पाठ में लेखिका ने अपने बचपन की यादों का वर्णन किया है। वे बताती हैं कि उनके समय का बचपन आज के बच्चों के बचपन से बहुत अलग था। बचपन में वे शिमला में रहती थीं और अपने दैनिक कार्य स्वयं करती थीं। उस समय मनोरंजन के साधन कम थे, इसलिए बच्चे खेल-कूद और छोटी-छोटी चीज़ों में खुशी ढूँढ़ लेते थे।
लेखिका ने पुराने समय और आज के समय की वस्तुओं, खान-पान, पहनावे और जीवन-शैली की तुलना की है। वे बताती हैं कि समय के साथ बच्चों की रुचियाँ और जीवन जीने का तरीका बदल गया है।
मुख्य बिंदु
- लेखिका का बचपन शिमला में बीता।
- वे अपने जूते पॉलिश करती थीं और मोज़े धोती थीं।
- उन्हें घुड़सवारी का शौक था।
- रात में टेबल लैम्प की रोशनी में पढ़ने के कारण उन्हें चश्मा लग गया।
- पुराने समय में ग्रामोफोन, कुल्फी, शरबत आदि लोकप्रिय थे।
- आज के समय में टीवी, मोबाइल, आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स का प्रचलन अधिक है।
- लेखिका ने पुराने और नए समय के बचपन की तुलना की है।
कठिन शब्द एवं अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| संस्मरण | स्मृतियों का वर्णन |
| पोलिश | चमकाने का पदार्थ |
| ग्रामोफोन | पुराना संगीत बजाने का यंत्र |
| चिढ़ाना | मज़ाक उड़ाना |
| शरबत | मीठा पेय |
| फालसा | एक फल |
| स्टॉकिंग | लंबे मोज़े |
प्रश्न–उत्तर
1. लेखिका इतवार की सुबह क्या काम करती थीं?
उत्तर: वे जूते पॉलिश करती थीं तथा मोज़े और स्टॉकिंग धोती थीं।
2. लेखिका को चश्मा क्यों लगाना पड़ा?
उत्तर: रात में टेबल लैम्प की रोशनी में काम करने से उनकी आँखें कमजोर हो गई थीं, इसलिए उन्हें चश्मा लगाना पड़ा।
3. लेखिका ने पुराने और नए समय में क्या अंतर बताया?
उत्तर: पहले कुल्फी, शरबत और ग्रामोफोन थे, जबकि आज आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स, टीवी और आधुनिक साधन हैं।
पाठ से शिक्षा
- हमें अपने बचपन की अच्छी यादों को संजोकर रखना चाहिए।
- समय के साथ जीवन में परिवर्तन आता है।
- आत्मनिर्भर बनना और अपने काम स्वयं करना अच्छी आदत है।
एक पंक्ति में
“बचपन” पाठ में लेखिका ने अपने बचपन की यादों और पुराने तथा वर्तमान समय के बच्चों के जीवन की तुलना की है।